About Lata Mangeshkar in Hindi

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Lata Mangeshkar Biography in Hindi

लता मंगेशकर हिंदी फिल्म जगत की सर्वश्रेष्ठ गायिकाओं में से एक माना जाता है।

इनकी मृत्यु दिनांक 6 फ़रवरी 2022 को मुंबई के अस्पताल में हो गयी ।   

उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दुनिया में सबसे ज्यादा गाने रिकॉर्ड करने वाले कलाकार के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1942 में की और सात दशकों से भी ज्यादा समय तक अपनी छाप छोड़ी। ऐसा माना जाता है कि लता लगभग एक हजार से अधिक हिंदी फिल्मों के लिए अपना स्वर दिया है।

उन्हें छत्तीस से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं (भारतीय) और विदेशी भाषाओं में गाने का श्रेय प्राप्त है। लता मंगेशकर की गायिका आशा भोसले, उषा मंगेशकर और मीना मंगेशकर (बहनें) और निर्देशक हृदयनाथ मंगेशकर (भाई) की बड़ी बहन हैं।

उन्हें वर्ष 1989 में भारत के सर्वोच्च सिनेमा पुरस्कार, दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया था।

महान गायिका लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 में इंदौर, मध्य प्रदेश में हुआ था। वह एक भारतीय प्लेबैक गायिका और संगीत निर्देशिका हैं।

वह भारत की सबसे सम्मानित प्लेबैक गायिकाओं में से एक हैं।

आइए उनकी जीवनी पर एक नज़र डालें जिसमें उम्र, शिक्षा, परिवार, गायन कैरियर, पुरस्कार, सम्मान आदि शामिल हैं।

लता मंगेशकर जीवनी - Lata Mangeshkar Biography in Hindi

नाम

लता मंगेशकर

पूरा नाम

लता दीनानाथ मंगेशकर

बचपन का नाम

हेमा

क्षेत्र

गायन

उम्र

92 वर्ष

पति

अविवाहित

पिता

दीनानाथ मंगेशकर

माता

सेवंती मंगेशकर

बहन

मीना मंगेशकर, आशा भोंसले, उषा मंगेशकर (गायिका)

भाई

हृदयनाथ मंगेशकर (संगीत निर्देशक)

राष्ट्रीयता

भारतीय

घरेलु नाम

हेमा, लता

ऊंचाई

5 फीट 1 इंच

वज़न

69 किलोग्राम

आँखें

काली

जन्मतिथि

28 सितम्बर 1929

धर्म

हिन्दू

वर्त्तमान पता

मुंबई

निवास

मुंबई

लता मंगेशकर की उपलब्धियाँ

महान गायिका लता मंगेशकर ने एक हजार से अधिक हिंदी फिल्मों में गाने रिकॉर्ड किए हैं और भारत में सबसे प्रसिद्ध और सबसे सम्मानित पार्श्व गायकों में से एक हैं।

उनकी मधुर और मनोरम आवाज है जो उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण है।

उस ज़माने में महज 13 वर्ष की किशोरवय उम्र में, वर्ष 1942 में लता मंगेशकर ने अपना गायन कैरियर  शुरू किया।

उनका कई भारतीय भाषाओं में लगभग 30,000 से अधिक गाने का रिकॉर्ड है।

उन्हें भारतीय सिनेमा की महानतम गायिकाओं में से एक माना जाता है और उन्हें 2001 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला।

लता मंगेशकर  की आयु, परिवार, प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर लता मंगेशकर को उनकी सुरीली (विशिष्ट) आवाज के लिए जाना जाता है।

इनकी आवाज़ ने कई दशकों तक लोगों के दिलों में राज किया। लता पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी थी।

उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर थे और उनकी माता शेवंती थीं।

उनके पिता एक प्रसिद्ध मराठी मंच कलाकार थे, जिन्हें लोकप्रिय रूप से मास्टर दीनानाथ के नाम से जाना जाता था।

लता मंगेशकर को उस समय के अनुसार छोटी उम्र में संगीत से परिचित कराया गया था।

उन्होंने मात्र 13 साल की आयु में वसंत जोगलेकर की मराठी फिल्म "किटी हसाल" के लिए अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया।

लता मंगेशकर का बचपन का नाम "हेमा" था।

बाद में, उसके माता-पिता ने उसका नाम बदल कर 'लता', एक महिला चरित्र, "लतिका" जो उसके पिता के एक नाटक, भवबंधन में अभिनीत किया गया था। 

इनके शिक्षा के बारे में ये कहा जाता है कि ये स्कूल ड्राप आउट है, इससे ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। 

लेकिन लता जी ने सिद्ध कर दिया कि केवल शिक्षा या डिग्री किसी को अपने टैलेंट से आगे बढ़ने का मोहताज़ नहीं है। 

संगीत की पहली शिक्षा इन्हें अपने पिता दीनानाथ से मिली। लता ने केवल पांच वर्ष की आयु में अपने पिता के संगीत नाटकों में एक अभिनेत्री के रूप में काम करना शुरू कर दिया था।

लता मंगेशकर का गायन कैरियर और उनकी संगीत यात्रा

अपने साथ वर्षों से अधिक के अपने गायन कैरियर में वह बॉलीवुड की प्रमुख और प्रसिद्ध अभिनेत्रियों के लिए प्लेबैक सिंगर के रूप में अपनी मधुर आवाज दी। 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय फिल्म संगीत पर उनके जादुई आवाज़ का गहरा प्रभाव पड़ा।

वर्ष 1942 के बाद से लता मंगेशकर ने अपने मनमौजी स्टाइल के गीतों से से संगीत की सीमाओं को लांघते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित दिया।

लता मंगेशकर संगीत निर्देशक के रूप में

लता मंगेशकर ने न केवन गायन में हाथ आजमाया बल्कि कई मराठी फिल्मों के लिए संगीत निर्देशक की भूमिका भी निभाई।

जिनमें से पहली 1955 में राम राम पावणे थी। उनकी अन्य परियोजनाएं

  • मराठा तितुका मेलवावा (1963), 
  • मोहित्यांची मंजुला (1963),
  • साधि मनसे (1965) और
  • तंबाडी माटी 1969) थीं।

उन्होंने फिल्म साधि मनसे के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार का सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का पुरस्कार मिला, जिसमें 'ऐरानिच्य देवा को सर्वश्रेष्ठ गीत का पुरस्कार मिला।

फिल्म निर्माता के रूप में लता मंगेशकर 

एक निर्माता के रूप में, लता मंगेशकर ने चार फिल्में बनाईं -

  • वडाल, 1953 में एक मराठी भाषा की फिल्म, 
  • 1953 में सी. रामचंद्र के साथ झांझर,
  • 1955 में कंचन और 1990 में गीतकार गुलजार के निर्देशन में बनी फिल्म लेकिन उन्होंने उसे 2012 में लॉन्च किया। 

उन्होंने अपना खुद म्यूजिक कंपनी जिसे एलएम म्यूजिक नाम दिया और छोटी बहन उषा मंगेशकर के साथ एक भक्ति एल्बम जारी किया।

लता मंगेशकर के अनछुए पहलु 

सुर कोकिला लता मंगेशकर की मधुर आवाज ने दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है, फिर भी उनकी निजी जिंदगी के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। 

उन्होंने जीवन भर शादी नहीं की, लेकिन वह प्यार से दूर नहीं रह सकी।

राजस्थान के डूंगरपुर शाही परिवार के राज सिंह उनके सच्चे प्यार थे। राज उन्हें प्यार से मिठू कहकर बुलाते थे।

लता के भाई हृदयनाथ मंगेशकर के साथ राज सिंह के घर आने पर उससे पहली नज़र में प्यार हो गया।

लता मंगेशकर और राज सिंह डूंगरपुर की दोस्ती धीरे- धीरे प्यार में बदल गई।

राज लता के संगीत के बहुत बड़े प्रशंसक थे और लता उनके क्रिकेट की प्रसंशक थीं। राज सिंह हमेशा अपनी जेब में टेप रिकॉर्डर लेकर लता के गाने सुनते थे।

लता मंगेशकर की शादी

लता और राज दोनों शादी करने को तैयार थे लेकिन राज सिंह के परिवार ने शाही रुतबे का हवाला देकर एक आम परिवार की लड़की तो बहु बनने के लिए तैयार नहीं हुए।

राज भी अपने परिवार के आगे झुक गए और शादी नहीं हो पायी।शादी नहीं होने के बाद भी उनकी दोस्ती लम्बे समय तक बनी रही।

हो सकता है इसके बाद लता ने आजीवन अविवाहित रहने का फैसला कर लिया

लता जी को दिया गया था धीमा जहर

लता के जीवन से जुड़ा के दुखद पहलु का भी उल्लेख मिलता है। लता मंगेशकर जब 33 साल की थीं तब किसी ने उन्हें धीमा जहर देकर मारने की कोशिश की थी।

लता जी ने एक बार एक इंटरव्यू में इसका जिक्र करते हुए कहा था, "हमारा पूरा परिवार इस बारे में कभी भी बात नहीं करते, वर्ष 1963 का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह हमारे जीवन का सबसे बुरा वर्ष था," ।

उन्हें इतनी कमजोरी लगने लगी कि वह बिस्तर से उठ भी नहीं सकती थी। हालात इस हद तक बढ़ गए थे कि लता चल भी नहीं सकती थी।

उन्हें धीमा जहर दिया गया था, इसकी पुष्टि हो गई थी। लता डॉक्टरों की चिकित्सा और अपनी इच्छा शक्ति की बदौलत ठीक हो पायी थी।

तीन महीने के लिए आराम करने के बाद वह सामान्य हो पायी थीं। लता ठीक होने के बाद लता जी ने पहला गाना फिल्म "महल", 'कहीं दीप जले कहीं दिल' की रिकॉर्डिंग हेमंत कुमार के संगीत निर्देशन में किया था।

इस गाने को सर्वश्रेष्ठ गीत का 'फिल्म्फार पुरस्कार' भी दिया गया था।

लता मंगेशकर के अनुसार, मजरूह सुल्तानपुरी ने उनके ठीक होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वह कहती हैं, ''मजरूह साहब अपने काम में व्यस्त होने और सोने के लिए बहुत कम मिलने के बावजूद रोज शाम को घर आते और लता के बगल में बैठकर मन को खुश करने वाली कविताएं सुनाते थे, रात को लता जी के लिए बनने वाले सादे खाने भी चाव से खाते थे''

बॉलीवुड हंगामा की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब लता जी से पूछा गया कि क्या यह सच है कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया था कि वह फिर कभी नहीं गा सकेंगी।

उन्होंने जवाब दिया, "यह सच नहीं है। यह मेरे धीमे जहर पर आधारित एक बनी हुयी एक काल्पनिक कहानी है।

लता जी ने खुलासा किया था कि उन्हें जहर किसने दिया था। 

उन्हें जहर देने वाले व्यक्ति का पता चला गया था, लेकिन उन्होंने कोई कानूनी कारवाई नहीं कि क्योंकि उनके पास उस व्यक्ति के खिलाफ कोई सबूत नहीं था।"

लता मंगेशकर को मिले पुरस्कार और सम्मान

लता जी ने अपने पुरे गायन कैरियर में अनगिनत पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है जो नीचे वर्णित है : -

  • 2009 - एएनआर राष्ट्रीय पुरस्कार
  • 2007 - लीजन ऑफ ऑनर
  • 2001 - भारत रत्न, भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार
  • 1999 - पद्म विभूषण
  • 1999 - लाइफटाइम अचीवमेंट्स के लिए ज़ी सिने अवार्ड
  • 1999 - एन.टी.आर. राष्ट्रीय पुरस्कार
  • 1997 - महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार
  • 1989 - दादा साहब फाल्के पुरस्कार
  • 1972, 1974 और 1990 - तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
  • 15 बंगाल फिल्म पत्रकार संघ पुरस्कार
  • 1959, 1963, 1966, और 1970 - चार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार।
  • 1993 - फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
  • 1994 और 2004 - फ़िल्मफ़ेयर विशेष पुरस्कार
  • 1984 - मध्य प्रदेश की राज्य सरकार ने लता मंगेशकर के लता मंगेशकर पुरस्कार की स्थापना की
  • 1992 - महाराष्ट्र राज्य सरकार ने लता मंगेशकर पुरस्कार की भी स्थापना की
  • 1969 - पद्म भूषण
  • 2009 - उन्हें फ्रांस के सर्वोच्च आदेश, फ्रेंच लीजन ऑफ ऑनर के अधिकारी के खिताब से नवाजा गया
  • 2012 - आउटलुक इंडिया के सबसे महान भारतीय सर्वेक्षण में उन्हें 10वें स्थान पर रखा गया था।
  1. उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा वर्ष 1989 में सम्मानित किया गया था।
  2. मानद डॉक्टरेट उपाधि : 1- इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़, 2- कोल्हापुर में शिवाजी विश्वविद्यालय.